कटघोरा वनमण्डल: नर्सरी प्रभारी ईश्वरदास मानिकपुरी की बानगी में भ्रष्टाचार का ‘हरा-भरा’ खेल; मास्टररोल मे फर्जी खेल,
प्रभारी की सरपरस्ती में फल-फूल रहा 'फर्जीवाड़ा':-

पसान/कटघोरा। कटघोरा वनमण्डल के वनपरिक्षेत्र पसान से भ्रष्टाचार की एक ऐसी ‘नर्सरी’ सामने आई है, जिसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। मामला अस्थाई रोपण वन प्रबंधन समिति गोलाबहरा में संचालित नर्सरी का है, जहां मजदूरों के पसीने की कमाई पर भ्रष्टाचारियों ने डाका डाल रखा है। सूत्रों की मानें तो यहां मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान के नाम पर खुलेआम फर्जीवाड़ा कर शासकीय राशि का बंदरबांट किया जा रहा है।
*प्रभारी की सरपरस्ती में फल-फूल रहा ‘फर्जीवाड़ा’:-*

इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड और कोई नहीं, बल्कि अस्थाई रोपण वन प्रबंधन समिति गोलाबहरा के प्रभारी ईश्वरदास मानिकपुरी को बताया जा रहा है। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, प्रभारी की नाक के नीचे और उनकी पूरी बानगी (मिलीभगत) में फर्जी मजदूरी का यह काला खेल दिन-रात फल-फूल रहा है।जो नर्सरी पौधों को जीवन देने के लिए बनाई गई थी, वहां भ्रष्टाचार के ‘पौधे’ इतनी तेजी से कैसे लहलहा रहे हैं?
*खेल समझिए, कागजों पर ‘मजदूर’, जेब में ‘पैसा’ :-*

नर्सरी में जमीनी हकीकत कुछ और है और सरकारी रिकॉर्ड कुछ और। सूत्रों का दावा है ऐसे लोगों के नाम पर मस्टररोल भरे जा रहे हैं, जिन्होंने कभी नर्सरी में कदम तक नहीं रखा। असली ग्रामीण और जरूरतमंद मजदूर काम के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि चहेतों और फर्जी नामों के खातों में सरकारी पैसा धड़ल्ले से ट्रांसफर किया जा रहा है। बाद में इस राशि को निकालकर आपस में बांट लिया जाता है।
*वन विभाग के उच्च अधिकारी मौन क्यों? :-*

इतने बड़े पैमाने पर हो रहे फर्जीवाड़े ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या कटघोरा वनमण्डल के आला अधिकारियों को इस बंदरबांट की भनक नहीं है? या फिर ‘ऊपर से नीचे तक’ सबका हिस्सा तय है? समाचार के माध्यम से मजदूर ग्रामीण अब मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो, मस्टररोल और बैंक खातों का मिलान किया जाए, ताकि ईश्वरदास मानिकपुरी और इस खेल में शामिल अन्य सफेदपोशों का असली चेहरा बेनकाब हो सके और सरकारी धन की डकैती रुक सके।









